मुख्य पृष्ठ
परिचय
व्रतोत्सव दीपिका
कार्यक्रम सूचना
सुझाव
फोटो गैलरी
हमारा पता
कार्यक्रम सूचना
 
जै जै श्री शुकदेव सम्प्रदा तासु कहाई।
भगवत धर्म बखान जक्त में भक्ति चलाई॥
चरणदास किये शिष्य सर्व गति ईश अचारज।
भये अभय बहु जीव सर्व के सारे कारज॥
सम्प्रदाय यह पॉचवी द्वारे है बहु भंति ही।
रामरूप लागो शरण जब मन आई शांति ही॥
(श्री मुक्ति मार्ग २०-२१)
सम्प्रदाय शुकदेव मुनि, प्रगट सकल संसार।
नित्य किशोर उपासना, युगल विहार अहार॥
युगल विहार अहार, केलि उज्जवल अति प्यारी।
रसना सों नित नाम, जपत श्री कुंज बिहारी॥
दृढ अनन्य सम्बन्ध मिले बिन होत न कारज।
सरस श्याम चरणदास, प्रगट भये रसिकाचारज॥
(श्री स. सा.॥ ३०२)
© 2011 All Rights Reserved, sarasnikunj.com® 
Site Designed & Developed by S.S. Compusoft