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कृपा पात्र • कृपा पात्र संत
पूज्य सहजो बाई जी
Pujya Sahjo Bai Ji
पावन चरित्र एवं जीवन दर्शन
श्री शुक सम्प्रदाय एवं संत श्री चरणदास जी महाराज की परम कृपा पात्र शिष्या। आपकी रचित अमूल्य वाणी 'सहज प्रकाश' निर्गुण-सगुण भक्ति रस, गुरु महिमा एवं आत्म-समर्पण की पराकाष्ठा है। सहजोबाई मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख संत-कवयित्री थीं, जिनका स्थान भारतीय अध्यात्म में अत्यंत सम्मानित है। संत चरणदास की शिष्या होने के कारण वे निर्गुण भक्ति और चरणदासी संप्रदाय की महत्वपूर्ण हस्ती मानी जाती हैं। गुरु-स्तुति पर आधारित उनकी प्रसिद्ध कृति ‘सहजप्रकाश’ में गुरु महिमा और निर्गुण भक्ति के सिद्धांतों का विस्तार मिलता है। स्त्री भक्त कवयित्रियों में विशिष्ट पहचान रखने वाली सहजोबाई के जीवन और साहित्यिक योगदान का परिचय इस लेख में बताया गया है।
'राम तजूँ पै गुरु न बिसारूँ।
गुरु के सम हरि कूँ न निहारूँ॥'
