सम्प्रदाय के प्रमुख पावन धाम एवं तीर्थ
श्री शुक सम्प्रदाय के पावन उद्गम, आचार्य प्राकट्य एवं निकुंज साधना के ऐतिहासिक तीर्थ स्थल, दर्शन समय व मार्गदर्शिका।

आचार्य पीठ श्री सरस निकुंज, जयपुर
श्री शुक सम्प्रदाय की प्रधान पावन आचार्य पीठ। यहाँ ठा. श्री लाडिली लाल जी का नित्य विराजित निकुंज स्वरूप, युगल सरकार एवं पूज्य आचार्य परम्परा की पावन गद्दी स्थापित है। यहाँ सदियों से अखंड संकीर्तन, पद-गायन, वाणी पाठ एवं नित्य निकुंज लीलाओं का दिव्य अनुष्ठान होता आ रहा है। देश-विदेश के साधक यहाँ आचार्य दर्शन, सत्संग एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन हेतु पधारते हैं।

आचार्यपीठ श्री बरसाना, जयपुर
श्री सरस निकुंज सम्प्रदाय से सम्बद्ध पावन निकुंज धाम एवं पूज्य महाराज जी का निवास स्थल। यहाँ श्री लाडिली लाल जी, श्री राधारानी एवं श्री शुकसखी के भावमयी दिव्य निकुंज उत्सव, रासलीला एवं उत्सव दर्शन आयोजित होते हैं। यह पावन स्थल साधकों के लिए ध्यान, साधना, नाम-जप एवं पूज्य महाराज जी से पावन भेंट का शांत एवं पवित्र केंद्र है।

श्री शुकताल तीर्थ (शुकतीर्थ)
गंगा के पावन तट पर स्थित वह परम पवित्र ऐतिहासिक उद्गम तीर्थ जहाँ 5000 वर्ष पूर्व भगवान श्री शुकदेव जी महाराज ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक श्रीमद्भागवत महापुराण की अमर कथा सुनाई थी। यहाँ प्राचीन अक्षय वट वृक्ष एवं पावन शुकदेव मंदिर स्थित है। यह समस्त शुक सम्प्रदाय एवं भागवत उपासकों का परम आराध्य उद्गम स्थल है।

श्री डेहरा धाम, अलवर
भक्त शिरोमणि संत श्री चरणदास जी महाराज का पावन जन्म एवं प्राकट्य स्थल। संत प्रवर का जन्म संवत 1760 (सन 1703 ईस्वी) में अलवर शहर से मात्र 8 किमी दूर स्थित इस पावन डेहरा ग्राम में हुआ था। यहाँ उनका ऐतिहासिक मंदिर, प्राकट्य पीठ एवं साधना स्थली स्थापित है जहाँ प्रतिवर्ष विशाल मेला एवं सत्संग समागम होता है।

श्री चरणदास जी की बगीची / मंदिर, दिल्ली
18वीं शताब्दी (सन 1750-1756) का ऐतिहासिक मुग़ल कालीन पावन धाम। यह स्थल भक्ति आंदोलन के प्रख्यात संत श्री चरणदास जी महाराज की प्रधान साधना स्थली, उपदेश पीठ एवं पावन समाधि स्थल है। यहाँ संत चरणदास जी महाराज के चरण चिह्न, हस्तलिखित ग्रंथ एवं उनकी शिष्याओं (सहजो बाई, दया बाई) की पवित्र स्मृतियाँ आज भी सुरक्षित हैं।
